कुछ नाम समय के साथ इतिहास बन जाते हैं, लेकिन लोगों के दिलों से कभी नहीं मिटते। सरधना विधानसभा में प्रो. रविंद्र पुंडीर ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प माना।
गांव-गांव, गली-गली लोगों के सुख-दुख में खड़े रहने वाले प्रो. रविंद्र पुंडीर ने अपने कार्यों और व्यक्तित्व से जो पहचान बनाई, वह आज भी सरधना की जनता के दिलों में जीवित है। उनके विकास कार्य, सादगी और जनता से जुड़ाव की मिसाल आज भी लोग याद करते हैं।
आज उनके पुत्र उत्कर्ष पुंडीर उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जनता के बीच पहुंच रहे हैं। जब वे गांवों में जाते हैं तो लोगों की आंखों में अपने प्रिय नेता प्रो. रविंद्र पुंडीर की यादें ताज़ा हो जाती हैं। बुजुर्गों का स्नेह, युवाओं का विश्वास और क्षेत्र की जनता का अपनापन इस बात का संकेत है कि प्रोफेसर साहब की बनाई हुई पहचान आज भी उतनी ही मजबूत है।
राजनीति में विरासत केवल नाम से नहीं चलती, बल्कि जनता के विश्वास और सेवा के संकल्प से आगे बढ़ती है। उत्कर्ष पुंडीर उसी विश्वास को लेकर सरधना के भविष्य की नई कहानी लिखने के लिए मैदान में हैं।
कौन जानता है कि आने वाला समय सरधना को फिर एक ऐसा जनप्रतिनिधि दे, जो अपने पिता की तरह जनता की आवाज़ बनकर क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाए। सरधना की जनता की उम्मीदें और आशीर्वाद आज उत्कर्ष पुंडीर के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
विरासत सिर्फ संभाली नहीं जाती, उसे कर्म और समर्पण से आगे बढ़ाया जाता है… और उत्कर्ष पुंडीर उसी राह पर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
